न कोई मूर्ति, न पुरोहित: पुरुलिया के इस 500 साल पुराने मंदिर में मां काली के साथ पूजे जाते हैं

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संवाद सूत्र, पुरुलिया। धर्म और आस्था की राहें भले अलग हों, लेकिन विश्वास और श्रद्धा इंसान को एक सूत्र में बांध सकते हैं। इसका अनूठा उदाहरण पुरुलिया जिले के हिड़बहाल गांव में देखने को मिलता है। यहां एक ही मंदिर में मां भद्रकाली के साथ सत्य पीर बाबा की भी आराधना होती है। करीब पांच सौ वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रही है।

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