दरिद्र खेदना: काली बिल्ली बनकर निकलती है दरिद्रता? दिवाली की रात सूप की आवाज़ सुनकर कहते हैं तुम्हारे घर से कोई भागता है, पर वो इंसान नहीं होता। 😱 कई इलाक़ों में दिवाली की रात घर की बुजुर्ग महिला सूप पीटकर "दरिद्र निकलो" कहती हैं। इसे दरिद्र खेदना कहते हैं। लोककथाओं में कहा जाता है कि हर थाप के साथ घर में छिपी दरिद्रता कभी काली बिल्ली, कभी परछाई बनकर बाहर भागती है, और सुबह चौखट पर उल्टे पैरों के निशान मिलते हैं। इसीलिए सूप पीटते वक्त दरवाज़ा पूरा खुला रखा जाता है। क्या आपके घर या गाँव में भी यह परंपरा निभाई जाती है? कमेंट में बताओ 👇 👻 ऐसी और परंपराओं के पीछे छिपी डरावनी लोककथाएँ देखने के लिए हमारे चैनल Bhootiya Kissa को SUBSCRIBE करो और 🔔 बेल आइकन दबाओ। ⚠️ डिस्क्लेमर: यह वीडियो एक प्रचलित परंपरा पर आधारित काल्पनिक लोककथा है, जिसका उद्देश्य सिर्फ़ मनोरंजन है। हम किसी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते और किसी धार्मिक आस्था, परंपरा या त्योहार का अपमान करना हमारा उद्देश्य नहीं है।
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