एक रात कावेरी, मोहन और उनकी छोटी बेटी गुड़िया को किराया न चुका पाने के कारण घर से बाहर निकाल दिया जाता है। उनके पास रहने की जगह नहीं होती, काम नहीं होता और आगे का रास्ता भी साफ नहीं होता। लेकिन एक छोटे से बस-स्टॉप से शुरू हुई चाय और नाश्ते की कोशिश धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदलने लगती है। मुश्किलें बार-बार उनका रास्ता रोकती हैं—बारिश से दुकान बर्बाद होती है, काम बढ़ने पर कावेरी की तबीयत जवाब देने लगती है और बाद में सड़क चौड़ी होने के कारण उनकी दुकान भी हटने वाली होती है। फिर एक छोटी सी कोशिश “साझी रसोई” का रूप लेती है, जहां गांव की कई महिलाओं को काम और अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिलता है। और वर्षों बाद जब वही भंवरलाल उनके सामने काम मांगने आता है जिसने कभी उन्हें रात में घर से निकाल दिया था, कावेरी एक ऐसा फैसला करती है जो इस कहानी का असली अर्थ बदल देता है। यह कहानी बताती है कि मुश्किल समय खुद कोई वरदान नहीं होता—लेकिन उसके बाद हम क्या बनाते हैं, वही हमारी आगे की जिंदगी तय करता है। अ
Open in Bideo App Install from Google PlayOpening Bideo App... Tap button above if not opened.