“ज़रा ठहरिए… आज कहानी उस इंसान की है, जिसने अंधेरे दौर में बराबरी की मशाल जलाने का साहस किया था… जिसकी कलम ने करोड़ों लोगों को अपने अधिकारों की आवाज़ दी— वो नाम था… बाबा साहब!” जिस दौर में हक़ की आवाज़ दबाई जाती थी, उस दौर में एक आवाज़ उठी— जिसने कहा, इंसान की पहचान उसकी जाति नहीं, उसका अधिकार और सम्मान है। बाबा साहब ने हमें सिर्फ़ संविधान नहीं दिया, उन्होंने बराबरी से जीने का अधिकार दिया। उनके विचारों की रोशनी आज भी साथ है, इसीलिए दिल में बाबा साहब का सम्मान आज भी ख़ास है। उनका संघर्ष हमारी ताकत है, उनकी सोच हमारी पहचान है, बाबा साहब का दिखाया रास्ता हमारे लिए हमेशा सम्मान है।
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